
Monday, August 31, 2009
गूगल की नज़र में हम भारतीय !
www.google.com पर जाये और टाइप करे "why are indians"। गूगल आपको ऑटो सजेस्ट में जो देगा वो गूगल की हम भारतीयों के बारे में समझ को दर्शाता है ।

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Saturday, August 15, 2009
बचपन की यादों में स्वतंत्रता दिवस
मेरे बचपन की यादों में स्वतंत्रता दिवस पर विविध भारती पर बजने गाने वाला एक देशभक्ति का गीत जो आज सुनाता हूँ ।
इन्साफ़ की डगर पे ....
इन्साफ़ की डगर पे,बच्चों दिखाओ चल के
ये देश है तुम्हारा, नेता तुम्हीं हो कल के
दुनिया के रंज सहना और कुछ न मुँह से कहना
सच्चाइयों के बल पे आगे को बढ़ते रहना
रख दोगे एक दिन तुम संसार को बदल के
इन्साफ़ की ...
अपने हों या पराए सबके लिये हो न्याय
देखो कदम तुम्हारा हरगिज़ न डगमगाए
रस्ते बड़े कठिन हैं चलना सम्भल-सम्भल के
इन्साफ़ की ...
इन्सानियत के सर पर इज़्ज़त का ताज रखना
तन मन भी भेंट देकर भारत की लाज रखना
जीवन नया मिलेगा अंतिम चिता में जल के
इन्साफ़ की ...
इन्साफ़ की डगर पे ....
इन्साफ़ की डगर पे,बच्चों दिखाओ चल के
ये देश है तुम्हारा, नेता तुम्हीं हो कल के
दुनिया के रंज सहना और कुछ न मुँह से कहना
सच्चाइयों के बल पे आगे को बढ़ते रहना
रख दोगे एक दिन तुम संसार को बदल के
इन्साफ़ की ...
अपने हों या पराए सबके लिये हो न्याय
देखो कदम तुम्हारा हरगिज़ न डगमगाए
रस्ते बड़े कठिन हैं चलना सम्भल-सम्भल के
इन्साफ़ की ...
इन्सानियत के सर पर इज़्ज़त का ताज रखना
तन मन भी भेंट देकर भारत की लाज रखना
जीवन नया मिलेगा अंतिम चिता में जल के
इन्साफ़ की ...
Wednesday, August 12, 2009
नसीब आजमाने के दिन ... (फ़िल्म: मुहाफिज़/In Custody)
नसीब आजमाने के दिन आ रहे हैं
करीब उनके आने के दिन आ रहे हैं
जो दिल से कहा है जो दिल ने सुना हैं
सब उनको सुनाने के दिन आ रहे हैं
अभी से दिल-ओ-जान सार-ए-राह रख करो
के लुटाने लुटाने के दिन आ रहे हैं
टपकने लगी उनके निगाहों से मस्ती
निगाहें चुराने के दिन आ रहे हैं
सबा फिर हमें पूछती रही है
चमन को सजाने कश्मीर दिन आ रहे हैं
फ़िल्म: मुहाफिज़/In Custody (1993)
गायक: शंकर महादेवन
संगीतकार: उस्ताद जाकिर हुसैन और उस्ताद सुलतान खान
अगर आप किसी के पास यह ग़ज़ल हो तो कृपया मुझे भेज दे
और जाने ...
करीब उनके आने के दिन आ रहे हैं
जो दिल से कहा है जो दिल ने सुना हैं
सब उनको सुनाने के दिन आ रहे हैं
अभी से दिल-ओ-जान सार-ए-राह रख करो
के लुटाने लुटाने के दिन आ रहे हैं
टपकने लगी उनके निगाहों से मस्ती
निगाहें चुराने के दिन आ रहे हैं
सबा फिर हमें पूछती रही है
चमन को सजाने कश्मीर दिन आ रहे हैं
फ़िल्म: मुहाफिज़/In Custody (1993)
गायक: शंकर महादेवन
संगीतकार: उस्ताद जाकिर हुसैन और उस्ताद सुलतान खान
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Tuesday, August 4, 2009
एक था "अब्दुल करीम" !
क्या आपने कभी यह नाम सुना है, कम से कम मैंने तो नहीं सुना था। मुझे आज ही पता चला की यह नाम "किशोर कुमार" का है। जिन्हें हम सब किशोर दा के नाम से जानते है।
यह बात तब की है जब किशोर दा ने मधुबाला से निकाह करने के लिए अपना धर्म बदला था। मधुबाला का नाम 'मुमताज़ बेग़म जहाँ देहलवी' था। मधुबाला एक पश्तून मुस्लिम परिवार की थी। ह्रदय की बीमारी की वजह से वो करीब १० साल तक बिस्तर पर रही थी।

किशोर ने मधुबाला से किये अपने वादे को उनके मरने से पहले पूरा किया। इसी वजह से किशोर कुमार को अपना धर्म और नाम बदलना पड़ा। अपना नाम बदल के "अब्दुल करीम" रहना पड़ा।
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